पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
बहन-भाई के लिए यह
है घड़ी उल्लास की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
सजल, सुशोभित थाल लेकर
सकल बहनें हैं सुसज्जित.
मधुर-मंगल गान गाती
वसन-भूषण से अलंकृत.
कर लिए रमणीय राखी
अति-मनोरम और सुन्दर.
किलकते, हँसते, उमगते
हर्ष-अपार लिए उर-अंतर.
लेने चली है वह परीक्षा
निज भाई के विश्वास की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
जहाँ रहें भैया हमारा
सकल भाँति फूले-फले,
यश-मर्यादा, धन-दौलत सब
रत्न अनूठे उसे मिले.
बांधकर निज बन्धु-कर में
पवित्र धागा प्यार से
उमंग में डूबी हैं बहनें
झूमती उदगार से.
आ गई बेला सुहानी
सुख-सहित मृदु-हास की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
बिषम संकट बीच में घिर
बहन जब होती प्रकम्पित,
निज बन्धु का लेकर सहारा
कर रही खुद को सुरक्षित.
परम-पावन सूत्र का बल
है विदित संसार में.
सब परस्पर बांटते हैं
विविध खुशियाँ प्यार में.
फट पडी बदली विरह की
फूटी किरण जब आश की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
-----------------मनोज कुमार झा "प्रलयंकर"
है घड़ी उल्लास की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
सजल, सुशोभित थाल लेकर
सकल बहनें हैं सुसज्जित.
मधुर-मंगल गान गाती
वसन-भूषण से अलंकृत.
कर लिए रमणीय राखी
अति-मनोरम और सुन्दर.
किलकते, हँसते, उमगते
हर्ष-अपार लिए उर-अंतर.
लेने चली है वह परीक्षा
निज भाई के विश्वास की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
जहाँ रहें भैया हमारा
सकल भाँति फूले-फले,
यश-मर्यादा, धन-दौलत सब
रत्न अनूठे उसे मिले.
बांधकर निज बन्धु-कर में
पवित्र धागा प्यार से
उमंग में डूबी हैं बहनें
झूमती उदगार से.
आ गई बेला सुहानी
सुख-सहित मृदु-हास की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
बिषम संकट बीच में घिर
बहन जब होती प्रकम्पित,
निज बन्धु का लेकर सहारा
कर रही खुद को सुरक्षित.
परम-पावन सूत्र का बल
है विदित संसार में.
सब परस्पर बांटते हैं
विविध खुशियाँ प्यार में.
फट पडी बदली विरह की
फूटी किरण जब आश की.
पूर्णिमा है आज श्रावण मास की,
-----------------मनोज कुमार झा "प्रलयंकर"

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