अहाँ किऐक नय आबई छी ओझा, लिखै छी चिट्ठी साली ओ,
अहाँ बिना नय मोन लगै अछि, घर लगैत अछि खाली ओ,
कहने छलौं अहाँ हमरा संs
फगुआ में हम आयब,
हमरा की बुझना जाइत छल
जाकs अहाँ बिसरायब.
माई अहाँ लेल रोज रखै अछि, काटि दूध केर छाली ओ,
केहन कठोर अहाँ भs गेलौं
जा केs अपना गाम
एत अहाँ के नाम जपै छी
निस दिन आठों जाम.
भौंरा भागल, कली बिखरि गेल, कत पडा गेल माली ओ?
नय अछि एतs एको टा फोटो
देखि धरब किछु धीर,
अहाँ बिना मन खिन्न भेल अछि
भरल नयन में नीर.
मोन होइत अछि हमरा सदिखन, दैत रहौं बड़ गाली ओ,
गर्मी छुट्टी होयत जखने,
झट दs एम्हरे आयब,
हमरा सभ के दर्शन दs के
मन के किछु हरषायब
स्वागत हित हम ठाढ़ भेल छी, लs के फूलक डाली ओ,
अहाँ किऐक नय आबई छी ओझा, लिखै छी चिट्ठी साली ओ,
अहाँ बिना नय मोन लगै अछि, घर लगैत अछि खाली ओ,
(हमर मैथिली रचना संग्रह "खंजन" सं लेल गेल)
------------ मनोज कुमार झा "प्रलयंकर"

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